अंबेडकर पर राजनीति

14 अप्रैल 2016 का दिन ऐसा था मानो लोकसभा के चुनाव के प्रचार का आखिर दिन हो और मतदाताओं को लुभाने के लिए सभी राजनितिक पार्टियों ने एक-दूसरे पे जम कर हमला किया । सभी लोग अम्बेडकर को लेकर दलित जाति कार्ड खेल रहे थे ऐसा लग रहा था जैसे अम्बेडकर का जन्मदिन न हो कर लड़ाई का दिन हो सब अपने-अपने तरीके से अम्बेडकर का जन्मदिन मना रहे थे ।

Baba Saheb Ambedkar

मायावती ने बाबा साहब भीमराव अम्बेडकर की जयन्ती पर कहा कि बसपा के गठन के बाद से कांग्रेस और भाजपा जैसे दल अम्बेडकर जयन्ती मनाने के नाम पर किस्म-किस्म की ‘नाटकबाजी’ कर रहे हैं, बोल तो ऐसे रही थी मानो इन्होने ने कभी ऐसा कोई काम ही न किया हो । 

नीतीश कुमार भी जोश में थे उन्होंने ने पटना में जनता दल (युनाइटेड) कार्यालय में बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर की जयंती के मौके पर आयोजित एक समारोह में कहा  “बाबा साहेब के विचारों के ‘हत्यारे’ आज मना रहे हैं उनकी जयंती ” अब ये समझ नहीं आ रहा की वो खुद को बोल रहे थे या किसी और को ।

रोहित वेमुला के परिवार ने अपनाया बौद्ध धर्म और कहा – ‘आज से हम शर्म से आजाद रहेंगे’ । रोहित के भाई, राजा वेमुला ने कहा, ‘‘मेरा भाई दिल से बौद्ध था ।  रोहित के भाई की इस बात से ऐसा लग रहा था की वो गौतम बुद्ध के पदचिन्हों पर चल रहा था । जिस प्रकार से महात्मा बुद्ध ने डाकू अंगुलिमाल का हृदय परिवर्तन किया था ठीक उसी प्रकार से याकूब मेमन की फांसी का विरोध करके आतंकवादियों का हृदय परिवर्तन कर रहा था ।

कन्हैया ने ” अंबेडकर के लिखे संविधान पर हो रहा हमला ” ये शब्द उस व्यक्ति के थे जो आतंकवादियों का समर्थन करने वालो का साथ दे रहा था और तो और देश की सेना को बलात्कारी बता रहा था इतना करने के बाद भी देश में घुम रहा है और बोल रहा संविधान पर हो रहा हमला अगर देश में संविधान न होता तो तू जेल में केले छील रहा होता ।

नरेंद्र मोदी भी इस बार दलित कार्ड खेलने से वो भी पीछे नहीं रहे, बिहार की हार से सबक लेकर विकाश की जगह जात की राजनीती में वो उतरते दिखाई  ।

केजरीवाल इनके बारे में क्या कहे ये तो बस उंगली उठने के लिए पैदा हुये है ।

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